“आँखें तेरी हैं ज़ाम सी”

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अल सुबह सलाम सी
उल्फ़त के म़काम सी
इश्क़ रंग ओढ़े हुई यूँ
आँखें तेरी हैं ज़ाम सी

नूर अब्र में नहाई हुई
रूहानी इक हमाम सी
मयक़दा यूँ इस कदर
आँखें तेरी हैं ज़ाम सी

दिल में यूँ उतरते हुए
सूफ़ियाना कलाम सी
हुस्न-ओ-नज़ाकत लिए
आँखें तेरी हैं ज़ाम सी

ख़ुशनुमा एहसास लिए
सद़ाकत के पयाम सी
मौला की इनायत ये
आँखें तेरी हैं ज़ाम सी

ज़िक्र-ए-इलाही में यूँ
पाकीज़ा एहतराम सी
हसीं कोई हसरत पिए
आँखें तेरी हैं ज़ाम सी

मुकद्दस अफज़ल है यूँ
रब के अज़ीम नाम सी
शरबती से ख़्याल पिए
आँखें तेरी हैं ज़ाम सी

नमाज़ी की तरह गहरी
सज़दे में हैं क़याम सी
खूबसूरत बेपनाह लगे
आँखें तेरी हैं ज़ाम सी

सब्ज़ एहसास को पिए
कुदरत के एहकाम सी
शफ़क्कत यूँ ओढें हुए
आँखें तेरी हैं ज़ाम सी

मन मेरा यूँ ख़ुश़्क पत्ता
निगाहें तेरी किमाम सी
ग़ज़ल कहूँ, के कहूँ नज़्म
आँखें तेरी हैं ज़ाम सी
आँखें तेरी हैं ज़ाम सी ।।

# रॉक-शायर

अल सुबह – प्रात काल
सलाम – प्रणाम
उल्फ़त – प्रेम
मक़ाम – गंतव्य, मंज़िल
ज़ाम – भरा हुआ गिलास
नूर – प्रकाश
अब्र – बादल
रूहानी – आध्यात्मिक
हमाम – स्नान
मयक़दा – शराब सी, मधुमय
सूफ़ियाना – सूफी विचार में डूबा
कलाम – वाक्य, कथन, रचना
हुस्न – सुंदरता
नज़ाकत – मृदुता, कोमलता
सदाक़त – सही राह, सत्य पथ
पयाम – सन्देश
मौला – ख़ुदा, ईश्वर, रब
इनायत – कृपा, दया दृष्टि
ज़िक्र-ए-इलाही – प्रभु की भक्ति वंदना
पाकीज़ा – पवित्र
एहतराम – सम्मान
हसीं – सुन्दर
हसरत – इच्छा, ख़्वाहिश
मुक़द्दस – पवित्र
अफज़ल – उच्चतम
अज़ीम – सबसे बड़ा
सजदा – सर झुकाना, माथा टेकना
क़याम – ठहरना
एहकाम – फरमान, कथन
शफ़क्कत – दया, अनुकृपा, मेहरबानी
ख़ुश़्क – सूखा
किमाम – पान पर लगाने वाला द्रव्य

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