“बेनज़ीर हो तुम”

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नज़ीर क्यां पेश करू, खुद बेनज़ीर हो तुम
फ़क़त रूह-ए-दिल की, अब वज़ीर हो तुम

जी करे सुनता जाऊ, मैं सब बातें तुम्हारी
महफ़िल-ए-अदब की, नेक तक़रीर हो तुम

रुख पर लिखा है, पाकीज़ा सा इक कलाम
आयत-ए-कुरआन सी, वो तफ़सीर हो तुम

जलतरंग से बनी हुई, इश्क़ रंग में सनी हुई
रूह पतंग में बसी हुई, एक तसवीर हो तुम

इबादत में अक्सर, होता है दीदार तुम्हारा
दुआओं से हासिल हुई, मेरी तक़दीर हो तुम

हयात के सफ़र की, यूँ दास्तां है ‘इरफ़ान’
साँसों पर लिखी हुई, ज़िंदा तहरीर हो तुम

© रॉकशायर
(इरफ़ान अली खान)

नज़ीर – उदहारण
बेनज़ीर – अनुपम, बेमिसाल
फ़क़त – सिर्फ
रूह-ए-दिल – ह्रदय और आत्मा
वज़ीर – मंत्री
महफ़िल-ए-अदब – साहित्यिक सभा
तक़रीर – भाषण
रुख – चेहरा
पाकीज़ा – पवित्र
कलाम – लिखित रचना, गीत
आयत-ए-कुरआन – पवित्र ग्रन्थ कुरआन शरीफ में क्रमानुसार लिखे वाक्यांश
तफ़सीर – व्याख्या
इबादत – पूजा
दीदार – दर्शन
हयात – ज़िंदगी
तहरीर – लिखित दस्तावेज

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