“म्हारों शहर, ओ जैपुरियों” (My City Pink City Jaipur)

मेरी पहली राजस्थानी कविता
गुलाबी नगरी जयपुर को समर्पित है
कही कोई त्रुटि हो तो क्षमा करे …

Jaipuriyon Desktop2

गुलाबी रंगा में रंग्यों छै, म्हारों शहर ओ जैपुरियों
चौङी चौङी सङका पे जडे, उङतो फिर वो लहरियों

दुकाना ऐ सब लाईना में, यूँ खङी खङी इतरावें है
हवामहल की खिङक्या सू, वा ठण्डी हवा आवें है

सांगानेरी चूंदङी की पछै, वे बातां ही काई केणी छै
देसी विदेसी सगळा ही अडे, ईका घणा दिवाना छै

नाहरगढ, जयगढ, आमेर, जलमहल, कनक-घाटी
ऐ सगळा ही तो है, कॉलेज वाळा री घूमण दी वाटी

जंतर-मंतर, राजमंदिर, अल्बर्ट-हॉल, सिटी-पैलेस
कारीगरी सू बण्या छै, शहर का ऐ पूठरा नेकलेस

परकोटा सागे गेट खड़ा, सुरक्षा रो पक्को इंतजाम
ज्वैलरी अडा री फेमस, चोखों छै नगीना रो काम

ऐ सगळी बातांचीता, वा बरसा पुरानी धरोहर री छै
आज को जैपुरियों शहर तो, दो कदम खुद आगे छै

चारों तरफ अडे, कन्स्ट्रकशन रो जाळ बिछ ग्यो
लो-फ्लोर बसा चाली, मेट्रो को वो जाळ बिछ ग्यो

क्रिस्टल-कोर्ट, एमजीएफ, डब्ल्यूटीपी, एमआई रोङ
एक सू बढ़र एक छै, माचे जठे खरीदबावाळा री होङ

जवाहर-सर्किल, ईपी, सेन्ट्रल-पार्क, आईनोक्स, जीटी
छोरा छोरियाँ रोज जडे, बजावे अपणा दिल री सीटी

यूनिवर्सिटी, स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, है सब एवन
तरक्की का पहिया पर अडे, चाल पङ्यो अब जीवन

लिखबा गर बैठू तो, जाणे कित्ती किताबा भर जावें
जैपुरियां रो बखाण मगर, सम्पूर्ण ना कोई कर पावें

डोर पतंगा में रम्यो छै, म्हारों शहर ओ जैपुरियों
चौङी चौङी सङका पे अडे, उङतो फिरे वो लहरियों

© RockShayar
(इरफ़ान अली खान)

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