“कसम है मुझे”

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तेरी बेरहम उन बद्दुआओं की, कसम है मुझे
हस्ती यूँ मिटाऊंगा, एहसास तक ना होगा तुझे

दाँव कई चले जो तूने, चली वो गहरी चालें कई
घाव कई दिये जो तूने, दिये वो फरेबी झांसे कई

नकाब ओढ़ लेने से, किरदार वो छुप नहीं सकता
सफेदपोश चोगे में, गुनहगार वो छुप नहीं सकता

हर इक आमाल का यहाँ, होना है हिसाब एक दिन
ख़ुदा की नज़र से, शियाकार वो छुप नहीं सकता

रंजिशें कई बुनी जो तूने, बुनी वो गहरी साज़िशें कई  
बंदिशें कई चुनी जो तूने, चुनी वो फरेबी आतिशें कई  

हिजाब पहन लेने से, किरदार वो छुप नहीं सकता
रंग बिरंगे धोखे में, कसूरवार वो छुप नहीं सकता

हर इक आमाल का यहाँ, होना है हिसाब एक दिन
अल्लाह के कहर से, बदकार वो छुप नहीं सकता

तेरी जहरीली उन निगाहों की, कसम है मुझे
हस्ती यूँ मिटाऊंगा, एहसास तक ना होगा तुझे

                    © RockShayar

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