“तख़लीक़”

Stevens_Linda_Journalist

रेंगते रहते हैं सैकड़ों ख़्याल
खुद से सरकशी करते हुए
ख़ामोशी के ज़िस्म पर
फ़तह हासिल करता हैं
बस वो ही एक ख़्याल
सबसे उम्दा, सबसे अफज़ल
दूर कहीं सांस लेती हैं एक तख़लीक़
कई रंग छलकते हैं दामन में जिसके
हयात के सफर की तहरीर समेटे
फिर बयां होता हैं वो सुनहरा दौर
नज़ाकती मफ़हूम का…
तैरने लगते हैं अधजगे अल्फ़ाज़
सरगोशी के बदन पर
नफ़्स से बगावत करते हुए
सबसे ज़ुदा, सबसे बेहतरीन
बस वो ही एक एहसास
शक्ल इख़्तियार करता हैं
फिर आँखे खोलती हैं दूर कहीं एक तख़लीक़
कई रंग महकते हैं तफ़सीर में जिसके
रूह के शऊर की तसवीर लपेटे
और बयां होता हैं उन यादोँ का दौर
महफूज़ हैं जिनमें नज़्म के क़तरे
वही नज़्म जो खुद एक तख़लीक़ हैं

© RockShayar

1. सरकशी – Contumacy
2. फ़तेह – Victory
3. अफज़ल – Better
4. तख़लीक़ – Creation
5. हयात – Life
6. तहरीर – Manuscript
7. नज़ाकती – Sensitive
8. मफ़हूम – Essence
9. सरगोशी – Whisper
10. नफ़्स – Self
11. इख़्तियार – Construct
12. तफ़सीर – Interpretation
13. शऊर – Etiquette
14. महफूज़ – Secure
15. नज़्म – Poem

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