आओं चलें इरफ़ान की गली

20140810_103033

On birthday of my dear brother Irfan Ali Khan (The Rockshayar) I wtote a poetry for him…

लफ्ज़ो को हँसते मुस्कुराते ,
गमगीन हो आंसू बहाते ..
किसी ने देखा है कभी…

गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली …
आओं चलें फिर इरफ़ान की गली…

समन्दर से वसीह दिल में.. लहरों की तरह जज़्बात उठते
उन लहरों से उठते जज़्बातों को लफ़्ज़ों में तब्दील करते
किसी को देखा है कभी…“
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली …
आओं चलें फिर इरफ़ान की गली…

रूहानियत की कलम में स्याही शिद्दत की भरकर
इक कोरे कागज़ को अनमोल बनाते
किसी को देखा है कभी..
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली …
आओं चलें फिर इरफ़ान की गली…

एक शख़्श में छुपी हजार शख्शियतें
एक इन्सां को एलियन में तब्दील होते
उम्र गुज़ार खुद में अंदाज़-अलहदा पाते
किसी को देखा हैं कभीं..
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली …
आओं चलें फिर इरफ़ान की गली…

गर्दिशों के सियाह अंधेरो में चश्मा-ए-नूर बहाते
हादसों में खुद ही को खुद का हौसलां बढ़ाते..
हर गम की ख़ुशी मनाकर…गम को confuse करते
किसी को देखा है कभी..
गर ना देखा तो चलो मेरे यार की गली…
आओं चलें फिर इरफ़ान की गली..

    (c) Ashif Khan

 

 

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