“रहनुमा”

 

Mandy Moore Shane West A  Walk To Remember 001

चाहत का बादल, पलकों पर ठहर जाता हैं
मुझको तेरा साया, हर शै में नज़र आता हैं

साँसों में महफूज़ हैं, अब तक वो एहसास
जब भी मैं सोचता हूँ, रूह में उतर आता हैं

दर बदर भटका बहुत, ना मिल पाया सुकूं
दिल को जाने क्यूँ, बस तेरा शहर भाता हैं

सितारों का शामियाना, रातभर ओढ़े हुए
चाँद तेरे दीदार को, ज़मीं पर उतर आता हैं

सुरमई इन निगाहो में, जब कभी डूबता हूँ
रौशनी से धुला, इक रहनुमा उभर आता हैं

ग़ज़ल की ज़ुबां में, बयां कर रहा इरफ़ान
मुझको तेरा नक्श, हर लफ्ज़ में नज़र आता हैं

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