वसीयतनामा (Testament)

Please recite it loudly, nearby my Corpse…I’m always alive in You…Don’t be sad.. Just recite my poems…Words are immortal…

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कल ! अगर मैं ना रहूँ कहीं तो 
कल ! अगर मैं ना मिलू कहीं तो
हैरान मत होना, परेशान मत होना
सुन मैं तुझमें हूँ कहीं, देख मैं तुझमे हूँ यहीं
गर महसूस कर पाओ, हाँ मैं तुझमे हूँ कहीं ।

याद आये तो, मेरी डायरी पलट लेना 
बेवक्त ही कभी, मेरी शायरी पढ़ लेना
हाँ रोना कभी ना, चैन खोना कभी ना
सुन मैं तुझमें हूँ कहीं, देख मैं तुझमे हूँ यहीं
गर महसूस कर पाओ, हाँ मैं तुझमे हूँ कहीं ।

ख़ामोशी में मेरी, ग़ज़ल गुनगुना लेना
नज़्म पढ़ते पढ़ते, यूँही मुस्कुरा देना
बस इतना याद रखना, आहें कभी ना भरना
सुन मैं तुझमें हूँ कहीं, देख मैं तुझमे हूँ यहीं
गर महसूस कर पाओ, हाँ मैं तुझमे हूँ कहीं ।

कल ! अगर मैं ना रहूँ कहीं तो 
कल ! अगर मैं ना मिलू कहीं तो
उदास मत होना, मायूस मत होना
सुन मैं तुझमें हूँ कहीं, देख मैं तुझमे हूँ यहीं
गर महसूस कर पाओ, हाँ मैं तुझमे हूँ कहीं ।।

@RockShayar Irfan Ali Khan