तो अच्छा लगता है…

तुम जब बात करती हो तो अच्छा लगता है

तुम जब पास रहती हो तो अच्छा लगता है
 
तुमसे दूर जाना, मुमकिन नहीं है जाँना
तुम जब साथ रहती हो तो अच्छा लगता है
 
पाकर यह सोहबत तेरी, मुकम्मल हो गई मोहब्बत मेरी
तुम जब साथ चलती हो तो अच्छा लगता है
 
पल भर की जुदाई, सदियों से लंबी लगती है
तुम जब पास बैठती हो तो अच्छा लगता है
 
आज़ाद हवा सी उड़ती रहो, हरदम ओ हमदम
तुम जब खुलके बहती हो तो अच्छा लगता है
 
चेहरा यह तुम्हारा, है सावन की पहली बारिश
तुम जब अल्हड़ हँसती हो तो अच्छा लगता है
 
वैसे तो नक़ाबपोश चेहरा मेरा, इज़ाज़त नहीं देता किसी को

पर जब तुम मुझे यूं देखती हो तो अच्छा लगता है।

जब कई दिन हो जाते हैं तुमको देखे गए

जब कई दिन हो जाते हैं तुमको देखे गए

तो नज़रों को अपनी काबिलियत पे शक होने लगता है
 
निगाहों का अपनी निगाह पर यूं शक करना
उस वक़्त और भी पुख़्ता हो जाता है
जब ख़्वाब में भी तुम कहीं नज़र नहीं आती हो
हरज़ाई सी हकीकत बनकर ज़ेहन से उतर जाती हो
हर बार दूरियों का दामन थामकर दूर कहीं निकल जाती हो
 
इस बार सोच रहा हूँ
कि उस सोच को ही दबोच लू
जिस सोच में तेरा एहसास बसता है
गर नहीं हुआ जिस सोच में तेरा एहसास
तो उस सोच को ही नज़रों से खरोंच दूंगा
वैसे भी दिल को आजकल दर्द सहने का शऊर आ गया है
अजनबी राहों पर तन्हा चलने का यह फ़ितूर भा गया है
 
जब कई दिन हो जाते हैं तुमको सोचे हुए
तो ख़यालों को अपनी क़ैफ़ियत पे शक होने लगता है
इस शक को दूर करने का अब एक ही तरीका है

हमें मिलकर कुछ यादें सहेज लेनी चाहिए…

रोज़ाना तुमपे कुछ लिखने की सोचता हूँ….

रोज़ाना तुमसे बात करने की सोचता हूँ

रोज़ाना तुमपे कुछ लिखने की सोचता हूँ
 
रोज़ाना मगर उन अल्फ़ाज़ों की तलाश अधूरी रह जाती हैं
जिन अल्फ़ाज़ो के ज़रिए मैं तुम तक वो एहसास पहुंचा सकूँ
 
रोज़़ाना मगर उस एहसास की प्यास अधूरी ही रह जाती हैं
जिस एहसास के ज़रिए मैं तुम्हें अपने दिल की आवाज़ सुना सकूँ
 
जिन अल्फ़ाज़ों के साये तले मैं अपने वो ज़ख़्म सी रहा हूँ
जिस एहसास के साये तले मैं आजकल दोबारा जी रहा हूँ
 
हां वही मखमली अल्फ़ाज़, पढ़कर जिन्हें दिल की बेचैनियां दूर हो जाती हैं
हां वही सुरमई एहसास, महसूस कर जिसे जिन्दगी नूर से तर हो जाती है
 
हां वही अजनबी आवाज़, सुनकर जिसे मेरी धड़कनें तेज़ होने लगती हैं
हां वही मयकशी अंदाज़, देखकर जिसे पलकें नए सपने बुनने लगती हैं
 
रोज़ाना तुमसे बात करने की सोचता हूँ
रोज़ाना तुमपे कुछ लिखने की सोचता हूँ
 
रोज़ाना मगर ना तो वो अल्फ़ाज़ मिलते हैं, ना ही वो एहसास
अब तो बस दिल में बस चुकी है, पूरी तरह से एक ऐसी प्यास
 
जिसको अब भी है, तेरे लौट आने की आस
जिसको अब भी है, तेरे मिल जाने की आस
 
इसी आस ने तो अब तक ज़िंदा रखा है मुझे
वरना वक़्त ने तो कई साज़िशें की थी मौत की
 
मगर मैंने इन सांसों से किया था, सौदा एक सच्चा

मुझे यक़ीं था है और रहेगा, यह इश्क़ मेरा है सच्चा।

तुम बस एक ख़याल नहीं हो…

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तुम बस एक ख़याल नहीं हो, जो ज़ेहन की तश्तरी से भाप बनकर उड़ जाएं

तुम तो दरअसल एक ऐसा सवाल हो, जो कई सदियों से मन में उठ रहा है
 
कई बार मैंने अपने बावरे मन की प्याजनुमा परतों को खोलने की कोशिश की हैं
लेकिन हर बार खुद को उन्ही परतों के दरमियाँ बेसाख़्ता सा लिपटा हुआ पाता हूँ
 
खुद को पाने की मेरी वो कोशिशें आखिर तक दम नहीं तोड़ती हैं
मंज़िल की तलब नहीं हैं इन्हें, ये तो बस बरसों से यूँही बेख़बर हैं
 
जब भी ख़्वाबों का जहान हक़ीक़त के बेहद क़रीब पहुंचता है
फिर से वही एक नया सपनों का शहर बसना शुरू हो जाता है
 
तुम कोई शबनम की बूँद नहीं हो, जो सूरज निकलते ही गुम हो जाएं
तुम तो दरअसल एक ऐसा खुमार हो जो कई सालों से दिल पे छा रहा है
 
कई बार मैंने अपने नादान दिल की सहमी हुई आंखें टटोलने की कोशिश की हैं
लेकिन हर बार खुद को उन्ही नज़रों के दरमियाँ नाबीना सा ठहरा हुआ पाता हूँ
 
वज़ूद को बचाने की मेरी वो कोशिशें आखिर तक दम नहीं तोड़ती हैं
मंज़िल की तलब नहीं हैं रूह को, यह तो बस बरसों से यूँही बेसबर हैं
 
जब भी ख़्वाबों का जहान हक़ीक़त के बेहद क़रीब पहुंचता है
फिर से वही एक एक करके ख़्वाबों का टूटना शुरू हो जाता है
और यह सिलसिला कभी रुकता नहीं है,
बस चलता रहता है

बिना रुके बस चलता रहता है…

तुम्हारे जाने के बाद मुझको ये एहसास हुआ

तुम्हारे जाने के बाद मुझको ये एहसास हुआ
 के तुम्हें रोकने की कोशिश क्यों नहीं की मैंने

हालांकि जाते वक्त तुमने मुझे अपना पता बताया था
 लेेकिन तुम्हारा पता सुुुुनते वक्त मैं लापता हो चुका था

अब जो भी हो जानाँ, तुमसे मोहब्बत हो गई है
 तुम्हारी याद में जलना, यूं मेरी आदत हो गई है

हर वक्त तुम्हारी बातें करना, दफ्तर की नौकरी से बेहतर है
 हर घड़ी तुम्हारी आँखें पढ़ना, आईआईटी की तैयारी से बेटर है

आजकल तो इस नींद ने भी निगाहों से रिश्वत ले रखी है
 तुम्हारी तस्वीर देखे बिना ये स्लीप मोड में जाती ही नहीं

मुझे और मेरे जज़्बातों को समझने के बजाए महसूस करना
 तब तुम्हें पता चलेगा, ज़िंदगी हम पे क्यूँ मेहरबान हो रही है

गर फुर्सत मिले कभी, तो एक फोन कर देना यूंही कहीं
 कुछ बातें करनी हैं, वो जो कब से लबों पे आके ठहरी हैं

तुम्हें खोने के बाद मुझको ये एहसास हुआ
 के तुम्हें पाने की कोशिश क्यों नहीं की मैंने।
 

पिछले कुछ दिनों से बहुत ज्यादा याद आ रही हो

पिछले कुछ दिनों से बहुत ज्यादा याद आ रही हो
ऐसा लगता है मानो तुम मेरे और पास आ रही हो

वैसे इतने दिनों से पास ही तो हो तुम, दूर कब गई तुम
यह वहम तो नज़रों को क़दमों के निशां देखकर हुआ है

बहुत मुश्किल हो जाता है कभी-कभी दिल को संभाल पाना
दिल तो बच्चा है ना, अक्सर अपनी ज़िद पर अड़ जाता है

हालांकि अक़्ल भी कभी-कभी नादान होने की नक़्ल कर लेती है
लेकिन आखिर में यह भी अपनी समझदारी पर उतर आती है

और बना देती है मुझे हर बार, पहले से और ज्यादा सख़्त
ज़ेहन की वादी में फिर भी, पनपता रहता है वो यादों का दरख़्त

हरे पत्तों पे जिसके नज़र आता है तु्म्हारी ही नक्श
उसी नक्श की तलब ने तो बना दिया है मुझे, कोई और ही शख़्स

एक ऐसा शख़्स, जो ढूंढ रहा है खुद अपना ही अक्स 
आईना जिसकी आँखों में है, फिर भी नाबीना सा कर रहा है रक्स

इस बार तो अलविदा को भी अलविदा कहना है
अब और नहीं सहा जाता इन दूरियों का सितम

पिछले कुछ दिनों से बहुत ज्यादा याद आ रही हो
ऐसा लगता है मानो तुम मुझमें घर बना रही हो।

तुम्हारी याद जब आती है, मैं वो तस्वीर देख लेता हूूँ

तुम्हारी याद जब आती है, मैं वो तस्वीर देख लेता हूूँ
जिस तस्वीर मेंं तुम मुझ को मेरी तक़दीर लगती हो

कुछ ही तो तस्वीरें हैं तुम्हारी मेरे पास, सो किश्तों मेें देखा करता हूँ
कोई नहीं चाह सकता तुम्हें इस तरह, जिस तरह मैं तुम्हें चाहता हूँ

तुमसे जुड़ी हर चीज मुझे अब अपनी लगती हैं
तुम्हारी बातें वो यादें बहुत ही अच्छी लगती हैं

दूर जाकर भी हर वक़्त मेरे पास रहती हो
ऐसा लगता है मानो आसपास कहीं बैठी हो

याद है मुझे वो मुस्कुराकर मिलना तेरा
उसी मुस्कुराहट से तो बनता था दिन मेरा

कई बार तुमने ही तो जी भरके हँसाया मुझे
दर्द के दरिया से सौ बार बाहर निकाला मुझे

हालांकि तुमसे बात करने को, जी तो बहुत करता है मेरा
मगर मोहब्बत का मारा ये दिल बेचारा बहुत डरता है मेरा

रोज़ तुम्हारे नंबर मोबाइल में टाइप करके मिटा देता हूँ
मुझमें है तू कहीं, यही सोचकर खुद को तसल्ली देता हूँ

तुम्हारी याद जब आती है, मैं वो पल याद कर लेता हूूँ
जिस एक पल मेंं तुम मुझ को मेरी तक़दीर लगती हो

ज्योंही तुमने जाने की कहा, और मेरा यह चेहरा उतर गया

ज्योंही तुमने जाने की कहा, और मेरा यह चेहरा उतर गया
हालांकि ज्यादा कुछ हुआ नहीं, बस वक़्त वहीं पे ठहर गया

इस थोड़े से वक़्त में ही तुमने मुझे कई यादें दी हैं
याद हैं मुझे वो सब, बिन कहे जो हमने बातें की हैं

दिल ठहरा नादान, सो बिना सोचे समझे अपनी करता रहा
दिल ही दिल में चाहत पाल ली, कहने से मगर ये डरता रहा

तुम्हें तो शायद पता भी नहीं, के कितना चाहता हूँ तु्म्हें 
हर जगह नज़र आती हो, इतना ज्यादा सोचता हूँ तुम्हें

हर रोज़ दिन ढलने का इंतज़ार पसंद था मुझे
वही इंतज़ार, जिसने यूं बेक़रार किया था मुझे

तुम्हारे साथ बिताया हर एक लम्हा, पूरी सदी की तरह लगता है
अल्हड़ अलमस्त किरदार तुम्हारा, किसी नदी की तरह लगता है

हो सकता है…यह मोहब्बत मेरी एकतरफ़ा हो
मगर इतना ज़रूर कहूंगा, के तुम नेक वफ़ा हो

इतनी ख़ूबसूरत यादें देने के लिए शुक्रिया
पहली ही नज़र में अपना बनाने के लिए शुक्रिया

ज्योंही तुमने अलविदा कहा, और मेरा यह दिल टूट गया
हालांकि ज्यादा कुछ हुआ नहीं, बस यह फिर से बंजर हो गया।

 

ये ज़िंदगी नंबर से नहीं अंदर की आवाज़ से बनती है

सबने यही कहा कि दसवीं में अच्छे नंबर ले आओ तो ज़िंदगी बन जाएगी

पर किसी ने नहीं कहा ये ज़िंदगी नंबर से नहीं अंदर की आवाज़ से बनती है

मेरे दिल के दफ़्तर में एक लड़की काम करती है…

मेरे दिल के दफ़्तर में एक लड़की काम करती है
आसपास जिसके होने से यह ज़िन्दगी महकती है
 
जिस रोज़ वो नहीं आती है, उस रोज़ मेरा मन नहीं लगता है
जिस रोज़ वो नहीं दिखती है, उस रोज़ ये दिल बहुत डरता है
 
ना कोई बिन बुलायी मेहमान है, ना कोई पुरानी जान पहचान है
फिर भी ऐसा लगता है मानो, गुज़री यादों में उसके ही निशान है
 
उसकी एक मुस्कुराहट से दिन भर की थकान उतर जाती है
उसके क़दमों की आहट सुनते ही ख़ामोशी भी मचल जाती है
 
क़लम की तरह सीधे दिल पे वार करती है
आँखों ही आँखों में बेनज़ीर इक़रार करती है
 
मेरे दिल के दफ़्तर में एक लड़की काम करती है
आसपास जिसके होने से बंजर में भी बारिश होती है
 
जिस रोज़ वो नहीं आती है, उस रोज़ मेरा मन नहीं लगता है
उस रोज उसकी याद में हर एक पल मानो सदी सा गुज़रता है
 
ना कोई मुंतज़िर मेजबान है, ना कोई पुरानी जान पहचान है
फिर भी ऐसा लगता है मानो, उसी में बस गई मेरी जान है।

When a science student become poet….

फिजिक्स सब फेल है, तुम्हारी आँखों के आगे
मैथ्स डब्बा गोल है, तुम्हारी बातों के आगे
केमिस्ट्री कोई झोल है, तुम्हारी यादों के आगे
बायो डावांडोल है, तुम्हारी साँसों के आगे

सारे subject सारे concept, बदल के रख दिए तुमने
सारे principle सारे object, पलट के रख दिए तुमने

science की समझ से बाहर, एक अजूबा हो तुम
science student रह चुके शायर की महबूबा हो तुम

तुम्हारी चमकती हुई नज़रों ने ही तो मुझे reflection का पाठ पढ़ाया
तुम्हारी झुकती हुई पलकों ने ही तो मुझे gravity का गुर सिखाया

तुम्हारी महकती हुई खुशबू ने ही तो मुझे oxygen का एहसास कराया
तुम्हारी सुलगती हुई आरज़ू ने ही तो मुझे जला-जलाके carbon बनाया

तुम्हारे मखमली एहसास ने ही तो मुझे बिना दिल के जीना सिखाया
तुम्हारे अजनबी उस अक्स ने ही तो मुझे चट्टानों सा मज़बूत बनाया

तुम्हारे लहराते गेसुओं ने ही तो मुझे newton के नियम बताये
तुम्हारे बलखाते बाजुओं ने ही तो मुझे वायु के सिद्धांत समझाये

तुम्हारी बेहिसाब वफाओं ने ही तो मुझे हिसाब करना सिखाया
तुम्हारी बेनज़ीर सी बातों ने ही तो मुझे सवाल पूछना सिखाया

सारे नियम सारी theories पलट के रख दी तुमने
सारे किरदार सारी stories बदल के रख दी तुमने

विज्ञान के वज़ूद से दूर बस एक सपना हो तुम
विज्ञान छात्र रह चुके कवि की कल्पना हो तुम...

#RockShayar

ख़ुद को खोकर शख़्स कोई बेगाना ढूंढता हूँ…

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तुमसे बात करने का बहाना ढूंढता हूँ

तुम्हारी आँखों में गुज़रा ज़माना ढूंढता हूँ

न जाने कैसा सफ़र है नज़रों से नज़रों का

ख़ुद को खोकर शख़्स कोई बेगाना ढूंढता हूँ…

तुम्हारे पश्मीना पहलु की छांव

तुम्हारे पश्मीना पहलु की छांव मुझे ज़िंदगी की धूप से बचाती है
निगाहों की चादर बेचैनियां दूर करके अपने आगोश में सुलाती है

बहुत दिन हो गए हैं, बर्फ की उस ठिठुरती हुई बारिश में भीगे हुए
वादियों की सदा ख़्वाबों के ज़रिए आजकल अपने पास बुलाती है

हालाँकि तुम्हारे घर का पता, अब भी मेरे लिए है लापता
जब भी याद करने की कोशिश करता हूँ आँखें सब कुछ बहा देती है

तुम्हारा ज़िक़्र जब भी करता हूँ, ख़यालों से खुशबू आती है
रूह मेरी वो तुमसे जुड़कर मोहब्बत के तराने गुनगुनाती है

कई बार बहुत ज्यादा याद आती हो, रात भर पलकें भिगाती हो
लेकिन जब सुबह होती है, ओस की बूंदों की तरह गुम हो जाती हो

गर इत्तेफ़ाक़न ही मुलाक़ात हो जाएं तो उसे कुदरत का इशारा समझ लेना
इस दफ़ा अलविदा को अलविदा कहके दूर-दूर नहीं, हमें पास-पास है रहना

आज भी सोने से पहले तकिये के नीचे तुम्हारी तस्वीर रखता हूँ
क्या मालूम फिर से वही सुनहरे तुम्हारे ख़्वाब आने शुरू हो जाये

बेनज़ीर सी वो बातें ना सही मगर कभी तो हालचाल पूछने ही चली आओ
इंतज़ार को भी इंतज़ार करते हुए एक अर्सा हो गया है अब तो चली आओ…

पलकों के पीछे कई गहरे राज़ छुपे हैं

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पलकों के पीछे कई गहरे राज़ छुपे हैं
ज़िंदगी के ज़िंदा कुछ एहसास छुपे हैं।

अधजगी आँखों के अफ़साने बस इतना समझ लीजिए
ना लिख पाया जिन्हें वो अल्फ़ाज़ छुपे हैं।। 

6th Birth Anniversary of RockShayar

आज फिर दिल बहुत रो रहा है
आज फिर यूं सीने में दर्द हो रहा है
आज फिर वो चैन-ओ-सुकूं सब खो रहा है
आज फिर वही खौफ़नाक एहसास हो रहा है
आज फिर दिल बहुत रो रहा है।

आज फिर ये अश्क़ों का बोझ ढो रहा है
आज फिर ये नफ़रत के बीज बो रहा है
आज फिर वही दर्दनाक एहसास हो रहा है
आज फिर दिल बहुत रो रहा है।

आज फिर ये होश-ओ-हवास खो रहा है
आज फिर ये शदीद गहरी नींद सो रहा है
आज फिर वही अजनबी एहसास हो रहा है
आज फिर दिल बहुत रो रहा है
आज फिर दिल बहुत रो रहा है।।

 

पता नहीं क्या-क्या अंदर लिए बैठा है

नज़रो में अश्क़ों का समंदर लिए बैठा है

पलकों पे यादों का बवंडर लिए बैठा है।

एक अर्से से बहुत कुछ तलाश रहा है

पता नहीं क्या-क्या अंदर लिए बैठा है।।

 

 
 

बचके रहना ज़रा, मेैं दिल चुरा लेता हूँ

बातें ही नहीं, आँखें भी घुमा लेता हूँ
बचके रहना ज़रा, मेैं दिल चुरा लेता हूँ

नज़र न आ जाए कहीं, अश्क़ों में छुपा वो दर्द कभी
दिल की बेचैनी अक्सर, लफ़्ज़ों में छुपा देता हूँ

इससे बेहतर ख़ैरात, और कहाँ मिलेगी यहाँ
मुसीबत के मारे हुए, लोगों की दुआ लेता हूँ

और कुछ तो आता नहीं, इस दिल को कोई भाता नहीं
कच्ची पक्की सच्ची, जैसी भी हो यारी निभा लेता हूँ

जिस शख़्स से एहसास का अक्स जुड़ जाएं
उस शख़्स की पलकों पे अपनी पलकें सजा लेता हूँ

जुनून कहो हालात कहो, या कहो ज़िद कोई
बेदर्द ज़िंदगी से अपने हर दर्द की दवा लेता हूँ

मेरी ग़रीबी का मज़ाक उड़ाने वाले, बस इतना समझ ले 
पैसे तो नहीं, पर आजकल इंसान कमा लेता हूँ।

#RockShayar

 

“पड़ोस में रहने की बात कर के दूर चली जाती हो”

पड़ोस में रहने की बात कर के दूर चली जाती हो
लगता है तुम भी मेरी तरह खुद को आज़्माती हो

नज़रों के ख़त पढ़ना तुम्हें भी तो आता है
नादान ये दिल मेरा, इक़रार करने से घबराता है

सब जानकर भी, यूं अनजान बनती हो
तुम्हें पता है, तुम मेरे दिल में रहती हो

जब भी मुझसे बात करती हो, ये साफ़ पता चलता है
के मेरी तरह तुम्हारा भी दिल ये, जोरो से धड़कता है

मोहब्बत हो गयी है, इस बात को छुपाना क्यों
जज़्बात गर छुपा भी लो, तो आँखों में नज़र आ जाते हैं

जिस दिन तुम नहीं दिखती हो, आँखें बंद कर लेता हूँ
बंद आँखों से हर बार सामने तुमको ही पाता हूँ

बार-बार खुद को बस यही यक़ीन दिलाता हूँ
के इस बार तो यह ख़्वाब सुबह का ख़्वाब निकले

नींद खुलने से पहले जी भर के देखता हूँ तुम्हें
क्या पता फिर यह ख़्वाब ख़्वाब ही ना रह जाए

पलकों पे रहने की बात कह के गुम हो जाती हो
लगता है तुम भी मेरी तरह खुद को सताती हो।

सुन कभी तो तू मेरे दिल की आवाज़ भी…

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सुन कभी तो तू मेरे दिल की आवाज़ भी

तुम्हें देखते ही दिल, सफ़र पर निकल पड़ता है
तुम्हारी नज़रों के क़दमों का, ये पीछा करता है

और तब तक वापस नहीं लौटता है
जब तक ये खुद तसल्ली न कर ले
के वो खुशबू लौटकर फिर आ चुकी है
ख़्वाबों के महकते आशियाँ में
पलकों के पहरे देते कारवाँ में

तुम साथ नहीं हो तो क्या हुआ
तुम्हारी परछाई तो अब भी मेरे साथ है
जब भी दिल करता है
धूप में निकल पड़ता हूँ
कभी वो मुझे कुछ किस्से सुनाती है
कभी मैं उसे अपना हिस्सा बनाता हूँ

बस इसी तरह कट रहा है ज़िंदगी का सफ़र
बस इसी तरह महक रहा है यादों का शहर
बस इसी तरह एक दिन राहों में मिल जाओ कहीं
बस इसी तरह एक दिन निगाहों में रहने आओ कभी

बस एक खुशबू…

बस एक खुशबू की तलाश में क़दम चलते-चलते इतनी दूर चले आए

वरना ज़िंदगी ने तो चंद क़दमों के बाद ही रुकने की ज़िद पकड़ ली थी

 

“गर तुम साथ हो”

तुम्हें देखते ही दिल का शहर आबाद हो जाता है

गर तुम साथ हो तो हर पल मेरे लिए ख़ास हो जाता है

नज़रों के DSLR से मैंने बिन बताये तुम्हारी कई तस्वीरें ली हैं

आँखों से फिसलती नमी की तस्वीरें

गालों पे मचलती ज़िंदगी की तस्वीरें

बातों से झलकती ख़ुशी की तस्वीरें

होंठो से छलकती हँसी की तस्वीरें

वो सारी तस्वीरें, हैं मेरी साँसों की तक़दीरें

तुम्हें देखते ही सीने की ख़लिश खुद बखुद ख़त्म हो जाती है

गर तुम पास हो तो ज़िंदगी मेरे लिए उम्दा नज़्म हो जाती है

लम्हों के Lens से मैंने बिन बताये तुम्हारे कई हसीं पल Zoom किये हैं

आईने के सामने खुद को निहारने का पल

लहराती हुई ज़ुल्फ़ों को संवारने का पल

सुबह-सुबह अंगड़ाई लेने का पल

मुलाक़ात के वक़्त शर्माने का पल

वो सारे पल, हैं मेरी मुश्किलों के हल

तुम्हें देखते ही दुबारा जीने की ख़्वाहिश होती है

गर तुम साथ हो तो हर जगह बारिश होती है

पलकों के Panorama से मैंने बिन बताये तुम्हारे कई Shots लिए हैं

बारिश में बेफ़िक्र होकर झूमने का Shot

मोहब्बत से माथे को चूमने का Shot

आँखों से अक्सर बात करने का Shot

चेहरे को हिज़ाब से ढकने का Shot

वो सारे शॉट, हैं मेरी Thought की Boat

तुम्हें देखते ही हर सफ़र सुनहरी एक याद हो जाता है

गर तुम साथ हो तो हर पल मेरे लिए ख़ास हो जाता है।

#RockShayar

ख़लिश – सूनापन
उम्दा नज़्म – बेहतरीन कविता
हिज़ाब – आवरण

“तुमसे दूर होते ही खुद से दूर हो जाता हूँ”

तुमसे दूर होते ही खुद से दूर हो जाता हूँ
हर शब तुम्हारी यादें तकिये के नीचे पाता हूँ
 
कुछ यादें नींद को सुलाती हैं, कुछ यादें बहुत रुलाती हैं
कुछ यादें अपना बनाती हैं, कुछ यादें सपना दिखाती हैं
 
ख़्वाब में अक्सर वही हक़ीक़त देखता हूँ
हक़ीक़त में जो बस एक ख़्वाब लगती है
 
तुमसे नज़रें मिलाते ही खुद को भूल जाता हूँ
हर बार तुम को खुद में, और ज्यादा पाता हूँ
 
तन्हाई में आजकल तुम्हारा ख़याल बुनता हूँ
दबे पांव चली आती दिल की आहट सुनता हूँ
 
वही आहट, जिसे सुनने को कई बरस से कान तरस रहे हैं
वही चाहत, जिसके सदक़े में बिन मौसम बादल बरस रहे हैं
 
तुमसे दूर होते ही खुद से दूर हो जाता हूँ
हर शब तुम्हारी आँखें पलकों के नीचे पाता हूँ

“राजस्थान के लोक गीत”

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राजस्थान का दिल यहाँ के, लोक गीतों में बसता हैं
अवसर हो चाहे कोई भी, माहौल तो इन्हीं से बनता हैं

केसरिया बालम आओ नी, पधारो म्हारे देस
राज्य गीत ये गाये वही, पिया जिनके गये परदेस

पानी भरने वाली स्त्रियां, पनघट पर गाती हैं कई गीत
इंडोणी और पणिहारी के ज़रिए, पूछे कहाँ मेरा मनमीत

मेवाड़ का हमसीढ़ो तो जी, स्त्री-पुरुष का सामूहिक लोक गीत है
कैलादेवी के मेले में गूँजने वाला, लांगुरिया एक भक्तिगीत है

गणगौर के अवसर पे, गोल घेरे में घूमर गीत गाते हैं
विवाह में समधिनों के गाली गीत, सीठणे कहलाते हैं

गोरबंद नखराळो गीत में ऊँट का श्रृंगार बताया गया है
मोरिया अच्छा बोल्यो रे में सगाईशुदा की व्यथा बयां है

पीहर की याद में अक्सर बालिका वधू, चिरमी गीत गाती हैं
सूंवटिया में तोते द्वारा भीलनी, पति को संदेसा भिजवाती है

सिरोही क्षेत्र का ढोला-मारु, प्रेमकथा पर आधारित है 
उपवन में मिलन का पपीहा गीत, पक्षी को संबोधित है

काजळियो गीत गाते हुए, होली पर चंग बजाया जाता है
हाड़ौती और ढूँढाड़ के मेलों में पंछीड़ा गीत गाया जाता है

रातीजगे में रातभर जगती हैं, ब्याह में बना-बनी गाती हैं 
बारात का डेरा देखकर, औरतें जलो और जलाल गाती हैं

हिण्डोला सुणके, सावण झूला झूलने आता है
लाडो राणी की विदाई पे, ओल्यूँ गाया जाता है

बिछुड़ो गीत में एक पतिव्रता स्त्री की आत्मा रहती है
मरते वक़्त पति को वह दूसरी शादी करने को कहती है

होली के बाद मारवाड़ में कन्याएं, घुड़ला गीत गाती हैं
लावणी गीत गाकर ही नायिका, नायक को बुलाती है

अपने प्रियतम की याद में, विरहणी आँसू बहाती है 
कुरजाँ, कागा, और हिचकी जैसे कई गीत वो गाती हैं

एक बार आओ जी जवाई जी पावणा, दामाद के लिए है
कामण गीत वर-वधू को बुरी नज़र से बचाने के लिए है

खेतों में काम करते हुए, किसान भाई गाते हैं तेजा गीत
रामलीला और रासलीला, दोनों का मिलन है हरजस गीत

लोद्रवा की राजकुमारी पर आधारित, प्रेम गीत है मूमल
सुनकर जिसे रेतीले मन में, फूटने लगती है नव कोपल

कांगसियो जीरो सुपणा, रसिया पीपळी बधावा और जच्चा
माटी से जुड़े इन गीतों को सुनकर, होता है एहसास सच्चा

सुख-दुःख, विरह, बैर, भक्ति, श्रृंगार, वीर और प्रीत
अमर रहेंगे यूँही सदा, राजपूताना के सब लोक गीत

जितना जान पाया उसे, कविता में समेटने की कोशिश की है
बरसों पुरानी धरोहर को, काग़ज़ पे सहेजने की कोशिश की है।

“जताया नहीं जा सकता जिसे”

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बरसती हुई बारिश में, जैसे एक कप चाय मिल जाये
कई दिनों के बाद, जैसे कोई बिन बताये मिल जाये
सालों सूखे के बाद, जैसे सहरा में फूल खिल जाये
अलविदा कह चुका, बिछुड़ा कोई यार मिल जाये
तब कैसा लगता है? बताया नहीं जा सकता उसे
तब जैसा लगता है, छुपाया नहीं जा सकता उसे
तब वैसा लगता है, जताया नहीं जा सकता जिसे।

सफ़र में चलते-चलते, जैसे कोई पेड़ मिल जाये
छुपाकर रखा हुआ, यादों का कोई ढेर मिल जाये
दर्द से बिखरा हुआ, दोबारा कोई दिल जुड़ जाये
पिंजरे की बंदिश तोड़के, जैसे कोई परिंदा उड़ जाये
तब कैसा लगता है? बताया नहीं जा सकता उसे
तब जैसा लगता है, छुपाया नहीं जा सकता उसे
तब वैसा लगता है, जताया नहीं जा सकता जिसे।

लावारिस इस ज़िन्दगी में, जैसे कोई अपना मिल जाये
दर बदर भटकते हुए, घर जाने का रस्ता मिल जाये 
अँधेरों के आँगन में, नूर का कोई क़तरा मिल जाये 
दुआओं के दामन में, दिल का खोया टुकड़ा मिल जाये
तब कैसा लगता है? बताया नहीं जा सकता उसे
तब जैसा लगता है, छुपाया नहीं जा सकता उसे
तब वैसा लगता है, जताया नहीं जा सकता जिसे।।

#रॉकशायर

 

“ऐ अजनबी, तेरी बातें भी वही हैं”

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चेहरा भी वही है, आँखें भी वही हैं
ऐ अजनबी, तेरी बातें भी वही हैं

वही बातें वही मुलाक़ातें, सब कुछ वैसा ही है
जैसा मेरी सोच के सागर में, कोई मोती तैर रहा हो

कशिश ही कुछ ऐसी है, के कुछ पता ही नहीं चलता है
बस एक डोर है, जिसके सहारे मन ये मेरा खिंचा चला जाता है

तुम जब मुस्कुराती हो, ग़म कोसो दूर हो जाते हैं
दिल के सुर्ख़ दरिया में, चमकते नूर को पाते हैं

तुम्हारी खुशबू का हर इक क़तरा, मेरी साँसों में बहता है
संग तुम्हारे वक़्त बिताने का सपना, मेरी आँखों में रहता है

वही आँखें, जो कई बरसों से सोई नहीं हैं 
वही आँखें, जो एक अर्से से रोई नहीं हैं

वक़्त हो गर तुम्हारे पास, थोड़ा देना मुझे
मेरा वक़्त तो कब से, रूठा हुआ है मुझसे

तभी तो गुज़रता ही नहीं, ये बस गुज़र जाता है
मगर जब तुम्हें देखता हूँ, ये वहीँ ठहर जाता है

जहाँ बिछुड़ते वक़्त हमने, कुछ वादे किये थे खुद से
लगता है उन्हीं वादों को पूरा करने आयी हो फिर से

अंदाज़ भी वही है, आवाज़ भी वही है
ऐ अजनबी, तेरा एहसास भी वही है…

 

“बणी-ठणी” (भारतीय चित्रकला की किशनगढ़ शैली)

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ह केवल एक चित्र नहीं, संपूर्ण जीवन शैली है
बणी-ठणी की बात निराली, सौंदर्य की सहेली है

किशनगढ़ के राजा सावंत सिंह के काल में इसका उद्भव हुआ
राजपूताना की राधा कहलायी, और अजयमेरु का गौरव बढ़ा

प्रेयसी के प्रेम में मग्न होकर, महाराज नागरीदास कहलाये
मुसव्विर निहालचंद की कूची से, उसके कई पोट्रैट बनवाये

विख्यात आर्टिस्ट एरिक डिक्सन की, जब इस पर नज़र पड़ी
ऐसी नायाब पेंटिंग को उन्होंने, भारत की मोनालिसा संज्ञा दी

1755 ईस्वी में, इस चित्रशैली का विकास हुआ
देखने वालों को हर बार, नया एक एहसास हुआ

चेहरा और क़द लंबा, तथा नाक नुकीली रहती है
टकटकी बाँधे देखो इसे, यह तस्वीर बात करती है

बैकग्राउंड में इसके तालाब और, तैरती हुई नौकाएं हैं
थोड़ी मासूमियत थोड़ी नज़ाक़त, थोड़ी शोख अदाएं हैं

एक बार जो शख़्स इस बेनज़ीर तस्वीर को देख लेता है
दिल-ओ-दिमाग़ पे उसके, गज़ब का ख़ुमार छा जाता है

पलक झपकते ही, सुनहरे दौर में ले जाती है
यह वो तस्वीर है, जो आँखों से मुस्कुराती है

प्रेम की परिभाषा, सरल शब्दों में बताती है
रूप की मधुशाला, यह नैनों से छलकाती है

ऐसा अद्भुत आकर्षण है, के बताया ना जा सके
दिव्य आभा वो दर्पण है, जो छुपाया ना जा सके

किशनगढ़ का नाम, सारे जग में मशहूर किया
कलाप्रेमियों ने इसे, हाँ नाम हुस्न की हूर दिया

1973 में भारत सरकार ने, एक डाक टिकट जारी किया
बणी-ठणी कलाकृति को, जगत के ज़हन पर तारी किया

यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, मुकम्मल इतिहास है
दीदार करते ही जिसका, होता मखमली एहसास है।

#RockShayar
#ObjectOrientedPoems(OOPs)

 

“ख़ूबसूरत ही नहीं ख़ूबसीरत हो तुम”

ख़ूबसूरत ही नहीं ख़ूबसीरत हो तुम
दिल से की गई नेक नीयत हो तुम

हज़ार बार देखकर भी जिसे जी नहीं भरता हेै, 
पलकें झुकाने को कभी ये दिल नहीं करता है
नज़रों की नज़ाक़त भरी फ़िरदौस सी फ़ज़ीलत हो तुम

तारीफ़ नहीं हक़ीक़त है ये, चाहे मानो या ना मानो
फ़ुर्सत से की गई खुशनुमा वक़्त की वसीयत हो तुम

बेमिसाल कहूं के बेहिसाब, या बेपनाह या बेनज़ीर
अदा ना कर पाऊं जिसे, हाँ वही क़ीमत हो तुम

तुम्हारी बात करना अच्छा लगता है, 
तुम्हें याद करना सच्चा लगता है
निगाहों ने दिल को दी है जो, नेकदिल वो नसीहत हो तुम

सोचकर ही जिसे खुशी को भी खुशी मिलती है 
सुनो ना जानाँ, इस बेरंग ज़िंदगी की ज़ीनत हो तुम

मोहब्बत हो गई है तुमसे, अब और क्या कहूं मेैं खुद से
मासूमियत की मूरत हो जैसे सादगी की सीरत हो तुम।

 

“हर जगह तुम्हारी मौज़ूदगी का एहसास होता है”

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हर जगह तुम्हारी मौज़ूदगी का एहसास होता है
हर बार यह एहसास पहले से बहुत ही ख़ास होता है

इसी एहसास के दम पर तो इतना खुश रह पाता हूँ
हालाँकि हाल-ए-दिल तुमसे कभी नहीं कह पाता हूँ

कभी-कभी तो तुम मेरे ख़यालों में इतने क़रीब आ जाती हो
के तुम्हें देखने के लिए नज़रों का नया ताना बुनना पड़ता है

उसी दरमियाँ तुम कुछ ऐसा कर जाती हो
के बाद उसके मुझको बहुत याद आती हो

याद का भी ये कैसा अजब दस्तूर है
कम नहीं होता कभी, इश्क़ वो फ़ितूर है

फ़ितूर ने ही तो दर्द सहने की सलाहियत पैदा की है 
वरना हम तो दिल की तरह कब के टूट चुके होते

वैसे टूटा तो बहुत कुछ हैं अंदर
बस बताने और जताने को लफ़्ज़ नहीं हैं अंदर

गर लफ़्ज़ मिल भी जाये कोई
तो साथ अब वो शख़्स नहीं है

हर घड़ी जिसके आस-पास होने का एहसास होता है
हर बार यह एहसास पहले से बहुत ही ख़ास होता है।

 

“खुद अपनी ही मौत की अफ़वाह फैलाई हमने”

खुद अपनी ही मौत की अफ़वाह फैलाई हमने
दुश्मनों से भी दोस्ती निभाई हमने

पता ना चल जाएं कहीं तुम सबको
इसीलिए तो पहचान छुपाई हमने

सुना है के मोहब्बत और जंग में सब ज़ायज़ है
सही सुना है, तभी तो फ़तह पाई हमने

दर्द की सर्द हवाओं से राहत पाने की ख़ातिर
खुद अपने ही घर को आग लगाई हमने

एक रोज़ जब साये ने भी साथ छोड़ दिया
खुद से यारी निभाने की क़सम खाई हमने

पढ़ सको तो पढ़ो कभी इन पथराई आँखों के पन्ने
सब कुछ खोकर दुबारा ज़िंदगी पाई हमने

साज़िश बारिश रंज़िश ख़्वाहिश, क्या क्या नहीं देखा इरफ़ान
काग़ज़ को अपनी हर इक दास्तान सुनाई हमने।

 

“आज भी जब तुम्हारी याद आती है”

आज भी जब तुम्हारी याद आती है
आँखों से नींदें कोसो दूर चली जाती हैं
सपनो की दुनिया खुद एक सपना बन जाती है
बावरे मन को सांवरे की हर इक अदा लुभाती है
आज भी जब तुम्हारी याद आती है 
नैनों से यादें खुदबखुद बाहर आ जाती हैं…

तुम्हारे जाने के बाद बहुत दिनों तक मैं रोता ही रहा
तुम्हें खोने के बाद महीनों तक खुद को खोता ही रहा
तुम्हारे संग बिताये लम्हों की खुशबू पास बुलाती हैं
न देखे जो दिल ने कभी, ऐसे हसीं नज़ारे दिखाती हैं
आज भी जब तुम्हारी याद आती है
सीने से सब साँसें उफनकर बाहर आ जाती हैं…

तुमने कभी ग़ौर फ़रमाया हम क्यों मिले थे
धीमी-धीमी आंच में अंदर तक क्यों जले थे
क्यों ज़िंदगी तुम पे अपना हक़ जताती है
बंजर में बारिश का वो मंज़र दिखाती हैं
आज भी जब तुम्हारी याद आती है 
लबों पे ख़ामोशी क़ायम हो जाती हैं
आज भी जब तुम्हारी याद आती है
आँखों से नींदें कोसो दूर चली जाती हैं…

 

“बरसों बाद बंजर में जैसे, बरसती हुई बारिश लगती हो”

बरसों बाद बंजर में जैसे, बरसती हुई बारिश लगती हो
रोशनी की चादर ओढ़े, तुम तो कोई महविश लगती हो

सालों इबादत करते रहे, ख़ूब दुआएं मांगते रहे
रब ने पूरी की है जो, हाँ वही फ़र्माइश लगती हो

ना पूरा होना चाहती हो, ना अधूरा रहना चाहती हो 
सदियों से दिल में पल रही, तुम तो कोई ख़्वाहिश लगती हो

बेनज़ीर ओ मेरे माशूक मीर, चलाती हो तुम तो नज़रों के तीर 
पहली ही नज़र में हूर जैसे, हुस्न की पैमाइश लगती हो

पास रहती हो जानाँ जब तक, चलती रहती हैं साँसें तब तक
दूर जाते ही तुम तो जैसे, दर्द की आज़्माइश लगती हो

एक एक करके जगाती हो, दिल के सोये अरमां सभी
सालों से सीने में दबे हुए, एहसास की आराइश लगती हो

लापता जब से पता तुम्हारा, इतना ही पता चला ‘इरफ़ान’
अधूरा रहना क़िस्मत है जिसकी, हाँ वही गुज़ारिश लगती हो।

महविश – चाँद सा चेहरा 
पैमाइश – मापना
आराइश – सजावट

 

“दरमियाँ हमारे कुछ तो था”

ना तुमने कुछ कहा, ना मैने कुछ कहा
फिर भी न जाने क्यों, दरमियाँ हमारे कुछ तो था

यह अलग बात है कि तुम्हें अनजान बनने की अदा आती है
लेकिन मेरा क्या? मुझे तो तुम्हारे बिन साँसें भी नहीं सुहाती हैं

इतना आसां नहीं होता है, आसानी से किसी को भूल जाना
बहुत मुश्किल होता है, मिटती हुई उन यादों को रोक पाना

वक़्त की आँधी को भला क्या ख़बर, मेरे हाल-ए-दिल की
उसे तो संग जो भी मिले, संग अपने बस उड़ा ले जाना है

काश…वक़्त के पहियों में भी जंग लग पाता
कभी तो वो भी दो पल के लिए कहीं थम जाते

बस….उन्ही दो पलों में हम वो सारी अधूरी बातें कर लेते
जो उस आख़िरी मुलाक़ात में अधूरी रह गयी थी

जिस रोज़ ना तुमने कुछ कहा था, ना मैंने कुछ कहा था
फिर भी न जाने क्यों उस रोज़, काफी कुछ ऐसा हुआ था

जिसे बयां करने को एक अर्से से लफ़्ज़ तलाश रहा हूँ
क्योंकि जज़्बात तो मेरे लिए अब वो ख़्वाब बन चुके हैं

जो ख़्वाब में भी भूले भटके नज़र नहीं आते
गर नज़र आ भी जाये तो महसूस नहीं होते

बस इतनी इल्तिज़ा है तुमसे
एक बार आकर मुझे मेरा वो हिस्सा लौटा दो

जिसके बिन जीना मेरा अब वो जीना नहीं रहा
जिसके बिन मैं अब वो पहले वाला मैं नहीं रहा।

 

“सब याद है मुझे”

वो तेरा काँधे पे ज़ुल्फ़ें बिखेरना
वो तेरा सीने में साँसें समेटना
वो तेरा झुकी नज़रों से देखना
कुछ भी तो नहीं भूला मैं अब तक
सब याद है मुझे, सब याद है मुझे।

वो तेरा लबों पर लब रख देना
वो तेरा आँखों से सब कह देना
वो तेरा पलकों पे ख़्वाब सहेजना
कुछ भी तो नहीं भूला मैं अब तक
सब याद है मुझे, सब याद है मुझे।

वो तेरे नाम का असर
वो तेरे साथ का सफ़र
वो तेरे साये का शज़र
कुछ भी तो नहीं भूला मैं अब तक
सब याद है मुझे, सब याद है मुझे।

वो तेरा दूर चले जाना
वो तेरा नज़र न आना
वो तेरा मुझे भूल जाना
कुछ भी तो नहीं भूला मैं अब तक
सब याद है मुझे, सब याद है मुझे।

“तुम्हारा दूर चले जाना दिल को बहुत अखरता है”

तुम्हारा दूर चले जाना दिल को बहुत अखरता है
तुम्हारी याद में यह दिल मेरा तड़पता है

पिछली दफ़ा कहना भूल गया था तुमसे
के हद से ज्यादा मोहब्बत करता हूँ तुमसे
 
तुम चाहे बेख़बर रहो इस बात से
कितना याद करता हूँ तुम्हें? पूछो कभी बरसात से

बाहें खोलकर बारिश को आगोश में भर लेता हूँ
जिस रोज़ बेचैनी हद से ज्यादा सताने लगती है

तुम्हारी तस्वीर का ताना बुन रखा है
निगाहों के भीतर छुपे उस फ़नकार ने

जो अश्क़ों की गीली ज़मीं पर फिसल जाता है
और हर बार उठकर फिर चलने लग जाता है

तुम्हारा नज़र न आना नज़रों को बहुत अखरता है
दोबारा मिलने की आस में दिल यह मेरा धड़कता है

पिछली बार कहना भूल गया था तुमसे
के रूह बनकर तुम समायी हो मुझमें
हाँ रूह बनकर तुम समायी हो मुझमें।

“प्याज की तरह है क़िरदार मेरा”

प्याज की तरह है क़िरदार मेरा
परत दर परत खुलता ही जाता है
और आखिर में सब ख़त्म हो जाता है

याद रखना, मुझे काटते वक़्त तुम भी बहुत रोओगे
किश्तों में हुई मेरी बर्बादी पर तुम भी आंसू बहाओगे

ना सस्ता है, ना महंगा है
वज़ूद मेरा उड़ता पतंगा है

प्याज की तरह है क़िरदार मेरा
परत दर परत जिसमें कई राज़ दफ़्न हैं
जिन्हें जानने के लिए खुद से नाराज़ होना पड़ता है

ज़रा संभलकर छूना मुझे, मैं हर जगह अपनी गंध छोड़ देता हूँ
हो तक़दीर का तूफ़ान या लम्हों की लू, मैं सबका तिलिस्म तोड़ देता हूँ

प्याज की तरह है क़िरदार मेरा
परत दर परत खुलता ही जाता है
और आखिर में कुछ भी नहीं बचता है

बाक़ी रह जाती है तो बस वही खुशबू
जो ज़िन्दगी के मुँह से हर वक़्त आती रहती है।

#RockShayar

***तुम मुझे किसी की याद दिलाती हो***

तुम मुझे किसी की याद दिलाती हो
पल भर में उसी ज़माने में ले जाती हो
ज़ुल्फ़ों को उसी तरह काँधे पर गिराती हो 
पलकों को उसी तरह आँखों पर सजाती हो
लबों से उसी तरह मोती बरसाती हो
साँसों से उसी तरह फ़िज़ाएं महकाती हो
तुम मुझे किसी की याद दिलाती हो
पल भर में उसी ज़माने में ले जाती हो
तुम मुझे किसी की याद दिलाती हो।

मानो या न मानो, हूबहू उसी तरह मुस्कुराती हो
जानो या न जानो, रूबरू उसी तरह शर्माती हो 
मिलो या न मिलो, खुशबू उसी तरह फैलाती हो
दिखो या न दिखो, आरज़ू उसी तरह बन जाती हो
आँखें बंद करते ही यूं नज़र आती हो
तुम मुझे किसी की याद दिलाती हो
पल भर में बीते ज़माने में ले जाती हो
तुम मुझे किसी की याद दिलाती हो।

हर मुलाक़ात में ठीक उसी तरह सताती हो
हर बरसात में ठीक उसी तरह भिगाती हो
हर लम्हात में ठीक उसी तरह ठहर जाती हो
हर जज़्बात में ठीक उसी तरह नज़र आती हो
दफ़्न हो चुके दिल के वो सब अरमां जगाती हो
तुम मुझे किसी की याद दिलाती हो
पल भर में गुज़रे ज़माने में ले जाती हो
तुम मुझे किसी की याद दिलाती हो।

अक्सर उसी तरह, हिज़ाब से अपना चेहरा छुपाती हो 
अक्सर उसी तरह, तसव्वुर पे तुम बंदिश लगाती हो
अक्सर उसी तरह, बेनज़ीर सी वो बातें बताती हो 
अक्सर उसी तरह ,तन्हाई भरी रातें दे जाती हो
पल भर के लिए ही सही, ज़िंदा कर जाती हो 
तुम मुझे किसी की याद दिलाती हो
पल भर में उसी ज़माने में ले जाती हो
तुम मुझे किसी की याद दिलाती हो
तुम मुझे किसी की याद दिलाती हो।।

 

“ना पाने की ख़्वाहिश है, ना खोने का डर”

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ना पाने की ख़्वाहिश है, ना खोने का डर
ख़त्म हो जायेगा जो, है ज़िंदगी वो सफ़र
 
सफ़र में अक्सर, हवाओं से बात करता हूँ
तन्हा राहों पर, ख़ुद से मुलाक़ात करता हूँ
 
एक मुलाक़ात में सौ मुलाक़ातें छुपी होती हैं
कुछ रेशमी तो कुछ खुरदुरी सी बातें होती हैं
 
बातों का क्या हैं, बातें तो बस लफ़्ज़ों का लहज़ा है
असल तो उन बातों में बसा यादों का हसीं हिस्सा है
 
वही हिस्सा, जिसे याद करके ख़ुद याद भी मुस्कुरा उठती है
वही लहज़ा, जिसे पहनके सहमी हुई रूह भी जगमगा उठती है
 
सहमी हुई इस रूह को, जगमगाये हुए एक अर्सा गुज़र चुका है
जुड़े तो आख़िर कैसे जुड़े? ये दिल कई क़तरों में बिखर चुका है
 
हर एक क़तरे में, वक़्त का गुमशुदा अक़्स नज़र आता है
नज़रों का सफ़र, हर बार उसी जगह आकर ठहर जाता है
 
जिस जगह से सफ़र शुरू किया था, दोबारा वही आना हुआ
ख़ुद को खोया जब पूरी तरह, तब जाकर ख़ुद को पाना हुआ
 
ना हासिल करने की आरज़ू है, ना खोने का कोई ख़ौफ़
भर जायेगा एक रोज़ दिल जिससे, है ज़िंदगी वो शौक।
 
#RockShayar

“तब तुम्हें देखता हूँ मैं”

तुम जब कहीं और देखती हो
तब तुम्हें देखता हूँ मैं
यूं जब अपनी ज़ुल्फ़ें झटकती हो
तब तुम्हें देखता हूँ मैं

उस एक पल में खो जाता हूँ
उस एक पल में तुम्हारा हो जाता हूँ
तुम जब मुझको ऐसे पल देती हो
तब तुम्हें देखता हूँ मैं

तुम्हारे चेहरे का नेकदिल नूर
आँखों में साफ़ झलकता है
तुम जब हिज़ाब में चेहरा छुपाती हो
तब तुम्हें देखता हूँ मैं

मेरी नींदें उड़ाकर तुमने अपनी पलकों पर सजा ली
तभी तो जानाँ
तुम जब नींद में अपनी पलकें बंद करती हो
तब तुम्हें देखता हूँ मैं

बहुत कोशिश करता हूँ
धुंधली हो चुकी उन यादों को फिर से ज़िंदा करने की
मगर तुम जब यादों में नज़र नहीं आती हो
तब तुम्हें देखता हूँ मैं

मोहब्बत तुम्हें भी है मुझे भी है
ये छुपाये कहाँ छुपती है?
तुम जब धीरे से शरमाकर अपना मुंह छुपाती हो
तब तुम्हें देखता हूँ मैं

वैसे तो तुम्हारा पता 
अब लापता हो चुका है
पर फिर भी जब तुम भूले भटके मेरे ख़्वाबों में आती हो
तब तुम्हें देखता हूँ मैं।

 
 
 

“पुरानी यादें फिर से ताज़ा हो गयी”

 

पुरानी यादें फिर से ताज़ा हो गयी
जब एक लम्हें ने दिल पर दस्तक दी
बहुत देर तक मैं उस लम्हें को यूँही देखता रहा
यक़ीन को भी यक़ीन होने में बहुत वक़्त लगा

उस लम्हें ने वक़्त की पोटली से कुछ किस्से निकाले
और रख दिए सब के सब यूं मेरे सामने 
न मुझे सोचने का मौका मिला, न समझने का वक़्त
एक बार तो मैं भी हैरान रह गया
वक़्त की इस बेवक़्त मेहरबानी से

हालाँकि यादों के एक बवंडर ने मुझे अपने साथ उड़ाने की बहुत कोशिश की
मगर मैंने भी दिल की ज़मीन पर फैली चट्टानों को कसकर पकड़ रखा था

इसी कशमकश में न जाने कब वक़्त गुज़र गया, पता ही नहीं चला
पता तो तब चला, जब उस वक़्त का नाम गुज़रा हुआ वक़्त निकला

बेशक इस बार भी मैंने उस लम्हें को पकड़ने की बहुत कोशिश की
मगर हर बार की तरह इस बार भी हाथों पर अश्क़ों की नमी जमी थी
तभी तो इस बार भी वो लम्हा मुट्ठी से फिसल गया
जिस लम्हें को पकड़ने की कोशिश में मैं वहीँ थम गया 
और बाक़ी तो बस इन आँखों में यादों का मंज़र रह गया।

 
 
 
 


			

When a writer losing his cell phone, it’s happens….

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दोस्तों, यह कहानी है भूत काल बन चुके मेरे उस mobile की
life के memory card से delete हो चुकी एक फाइल की

सफ़र में उसका साथ बस इतना ही लिखा था
हाथों में उसका हाथ बस इतना ही लिखा था

हुआ यूँ, के पानी में गिरकर mobile मेरा मरहूम हो गया
गुज़रे चार सालों का flashback suddenly ज़ूम हो गया

इस story की शुरुआत, मुश्किल वाले दौर में उसकी grand entry से हुई थी
मोहब्बत वाले महीने में मेरी मुलाक़ात, एक रोज़ samsung S3 से हुई थी

उसके करिश्माई Cymera की मदद से मैंने कई हसीन लम्हें संजोये थे
उसकी stylish सेल्फियों से नज़रे चुराकर पलकों के परदे भिगोये थे

चलते-चलते music player ठिठक जाता था
बीच-बीच में अक्सर गाना अटक जाता था

पीठ पर मुहाज़िर बन चुके माज़ी की तस्वीर बनी हुई थी
color note में ज़िन्दगी की तमाम तहरीर लिखी हुई थी

अभी के लिए बस इतना ही, और ज्यादा कुछ नहीं कहना है
फ़िलहाल तो बस कुछ दिनों तक बिना सेलफोन ही रहना है

देखते हैं, इस बार कौनसा नया स्वचालित दूरभाष यंत्र आता है 
जो मनमौजी microwaves के ज़रिये, साड्डा मन बहलाता है।

 
 
 

“घर जाने की सूरत बदल गई”

पहले खुश होकर जाता था
अब नाखुश होकर जाता हूँ

कहने को घर अब भी वही है मेरा
बस घर जाने की सूरत बदल गई

घर के आंगन से साज़िशों की बू आती हैं
घर की दीवारें रंज़िशों का पता बताती हैं

घर का हर दर अपनों के सितम का गवाह है
घर में रहने वाले घर की बर्बादी की वज़ह है

पहले घर जाने के बहाने ढूंढता था
अब घर न जाने के बहाने ढूंढता हूँ

कहने को घर अब भी वही है मेरा
बस घर जाने की नीयत बदल गई

घर के बंद कमरों में ज़िंदगी सिसकती है
घर के तंग कोनों में दग़ाबाज़ी झलकती है

घर की बुनियाद में सदियों से धोखा पल रहा है
उसी ज़हर का असर है जो यह दिल जल रहा है

पहले घर से दूर जाने से डरता था
अब घर के पास आने से डरता हूँ

कहने को घर अब भी वही है मेरा
बस घर जाने की हसरत बदल गई।

“बेरोज़गार यादें”

काम की तलाश में बेरोज़गार यादें भटक रही हैं
ज़ेहन के दफ्तर में कहीं कोई वेकेंसी नहीं हैं
 
सोच का पुराना सिस्टम आजकल अपग्रेड हो चुका है
एहसास का एप भी तो कब का ऑउटडेटैड हो चुका है
 
अब तो बस फ्लैशबैक फ़ितूर का ही सहारा है
अरमानों का एम्प्लीफायर कब से शोर मचा रहा है
 
जाॅब की तलाश में बेरोज़गार यादें भटक रही हैं
ब्रेन को दिल की बदतमीज़ बातें खटक रही हैं
 
इश्क़ करने का अंदाज़ आजकल मोनोलिथिक हो चुका है
ज़िंदगी जीने का अंदाज़ भी तो अब रोबोटिक हो चुका है
 
ख़्वाहिशों को सप्रेस करना पड़ता है
और खुद ही को इंप्रेस करना पड़ता है
 
यादों का कम्युनिकेशन स्किल सही नहीं है
तभी तो लफ़्ज़ों में इमोशंस एन थ्रिल नहीं है
 
पर कोई बात नहीं नादान नाॅस्टेलजिक जज़्बात ही सही
थाॅट की बाॅट पर सवार होकर पहुंच जाएंगे कहीं न कहीं।